दुनिया पर क्लाइमेट चेंज का खतरा: क्या नए अंतरराष्ट्रीय समझौते बचा पाएंगे हमारी धरती? ( ClimateCrisis GlobalWarming COPAgreements)
- Dec 31, 2025
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आज के समय में 'क्लाइमेट चेंज' (Jalvayu Parivartan) सिर्फ एक वैज्ञानिक चर्चा नहीं, बल्कि एक विश्व-व्यापी संकट बन चुका है। दुनिया भर में बढ़ता तापमान, पिघलते ग्लेशियर और बेवक्त आती बाढ़ इस बात का सबूत हैं कि धरती का संतुलन बिगड़ रहा है।
क्लाइमेट चेंज क्या है?
जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण 'ग्लोबल वार्मिंग' है। जब हमारी धरती के वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन) की मात्रा बढ़ जाती है, तो वे सूरज की गर्मी को सोख लेती हैं, जिससे धरती का औसत तापमान बढ़ने लगता है। इसका सबसे बड़ा कारण बड़े उद्योग, गाड़ियों का धुआं और जंगलों की अंधाधुंध कटाई है।
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नए अंतरराष्ट्रीय समझौते (New Agreements)
दुनिया भर के देश अब इस खतरे को लेकर गंभीर हो रहे हैं। हाल ही में हुई COP (Conference of the Parties) की बैठकों में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं:
नेट जीरो एमिशन (Net Zero Emission): भारत समेत दुनिया के कई बड़े देशों ने लक्ष्य रखा है कि 2050 से 2070 तक वे 'नेट जीरो' उत्सर्जन हासिल करेंगे। इसका मतलब है कि जितनी कार्बन गैस वातावरण में छोड़ी जाएगी, उतनी ही पेड़-पौधों और नई तकनीक से वापस सोखी जाएगी।
नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy): सौर ऊर्जा (Solar Energy) और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए नए समझौते किए गए हैं ताकि कोयले और पेट्रोल पर निर्भरता कम की जा सके।
ग्रीन क्रेडिट पहल: भारत ने दुनिया के सामने 'ग्रीन क्रेडिट' का विचार रखा है, जो पर्यावरण संरक्षण को एक जन-आंदोलन बनाने पर जोर देता है।
भारत पर इसका प्रभाव
क्लाइमेट चेंज का सबसे ज्यादा असर खेती (Agriculture) पर पड़ रहा है। मानसून का चक्र बदल रहा है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अलावा, समुद्र के बढ़ते जलस्तर के कारण तटीय शहरों पर डूबने का खतरा भी बढ़ गया है।
हम क्या कर सकते हैं?
अधिक से अधिक पेड़ लगाएं और जंगलों को बचाएं।
सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करें।
बिजली और पानी की बचत करें।
सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) का अधिक उपयोग करें।
निष्कर्ष (Conclusion): अगर हमने अभी ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह धरती रहने लायक नहीं बचेगी। सरकारों के समझौते तभी कामयाब होंगे जब हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझेगा।









